सुहैल खान
नित्य संदेश, मुजफ्फरनगर। मुस्लिम बच्चियों के दीन और आधुनिक शिक्षा के संस्थान दारुल बनातुस सालेहात का समापन दुआ। कार्यक्रम शाह इस्लामिक लाइब्रेरी हॉल में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का विषय "मुस्लिम बच्चियों की शैक्षिक समस्याएं और उनके समाधान" था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता
दारुल बनातुस सालेहात की नाज़िमा आलिमा ज़ैनब खदीजी ने की, जबकि संचालन संस्थान की
छात्रा तहोरा रेहान ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत हाफ्सा दाऊद की तिलावत-ए-क़ुरान से
हुई, जबकि हम्द संस्थान की शिक्षिका आमरिन मलिक और नात शरीफ शिक्षिका इकरा इसराईल ने
पेश की। इस कार्यक्रम के संरक्षक कारी मोहम्मद खालिद बशीर कासमी रहें। उन्होंने अपने
बयान में कहा कि दो साल पहले शाह इस्लामिक अकादमी के ज़िम्मेदारों ने मुस्लिम बच्चियों
की शैक्षिक समस्याओं और जरूरतों को देखते हुए यह दीन और आधुनिक शिक्षा का संस्थान स्थापित
किया था। प्रारंभ में यहां कुछ ही छात्राएं थीं, लेकिन लगातार मेहनत और प्रयास से यह
शैक्षिक व्यवस्था आगे बढ़ी और आज सैकड़ों छात्राएं इस्लामी और आधुनिक शिक्षा प्राप्त
कर रही हैं, जो निश्चित रूप से भविष्य में कामयाब होंगी। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय
को खुद ही अपनी बच्चियों की शैक्षिक समस्याओं के समाधान तलाशने होंगे, अन्यथा इसकी
बड़ी हानि होगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता
कर रहीं संस्थान की नाज़िमा, शिक्षिका ज़ैनब खदीजी ने उपस्थित छात्राओं को नसीहत करते
हुए कहा कि अल्लाह जिसे पसंद करता है, उसे अपने दीन की समझ अता करता है और दीन का ज्ञान
प्राप्त करने और सिखाने के लिए उसे स्वीकार करता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान बिना मेहनत
के नहीं आता और मेहनत से प्राप्त किया गया ज्ञान कभी व्यर्थ नहीं जाता। कार्यक्रम का
समापन दुआ के साथ हुआ।
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